राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा कि वास्तविक धर्म सभी के साथ अपनत्व का व्यवहार करने और सभी विविधताओं को सौहार्दपूर्वक आगे बढ़ाने में निहित है। उन्होंने कहा कि लोगों को शिवाजी महाराज जैसा बनने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए, बल्कि एक अच्छा इंसान बनने का प्रयास करना चाहिए, परिवार और समाज को खुश रखना चाहिए और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, भागवत ने आरएसएस की ताकत स्वयंसेवकों में देखी, जिन्होंने चुनौतियों के बावजूद संगठन का विस्तार किया है। उन्होंने स्वर्गीय काशीनाथ गोरे के जीवन और कार्यों को याद किया, और कहा कि उनके कार्यों से प्रेरणा लेना और उन पर अमल करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने समाज में प्रेम और अपनत्व का प्रसार करके शक्ति उत्पन्न की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 100 वर्षों से स्वयंसेवकों द्वारा की जा रही मौन तपस्या के बल पर ही हम इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने सभी से अपनेपन की भावना जगाने और दुनिया के सामने एक मिसाल बनने का आग्रह किया।