
भारतीय वायु सेना ने रक्षा क्षेत्र का एक बड़ा सौदा पक्का कर लिया है, जिससे दुश्मन देशों में खलबली मच गई है। 8,000 करोड़ रुपये के इस ऐतिहासिक सौदे के तहत, तेजस लड़ाकू विमानों को 400 अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलों से लैस किया जाएगा। यह न केवल एक सामान्य अपग्रेड है, बल्कि भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में एक अभूतपूर्व वृद्धि है, जो इसे आसमान में एक अजेय शक्ति बनाएगी।
**ब्रह्मोस-एनजी: ‘ब्रह्मोस का बेटा’ है बेहद घातक**
ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल, ब्रह्मोस का उन्नत संस्करण है। यह मैक 3 (ध्वनि की गति से तीन गुना) की अविश्वसनीय गति से उड़ान भरती है। यह पहले के मॉडलों की तुलना में हल्की, अधिक चुपके (stealthy) और कहीं अधिक घातक है। इसकी लक्ष्य भेदने की क्षमता इतनी सटीक है कि एक बार निशाना लगने के बाद बचना लगभग असंभव है। यह मिसाइल अत्यधिक अनुकूलनीय है और इसे राफेल, सुखोई-30एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ युद्धपोतों और पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है।
**दुश्मनों के लिए ‘बुराइयों का पहाड़’ बनेगा तेजस**
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम है। तेजस विमान एक साथ दो ऐसी मिसाइलों को ले जा सकता है, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और गहरी मार करना आसान हो जाएगा। यह मिसाइल की गति और बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के कारण पाकिस्तान जैसे देशों की वायु रक्षा प्रणालियों (जैसे HQ-9 और HQ-16) के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल होगा।
**निर्यात का नया अध्याय: भारत बनेगा मिसाइल निर्यातक**
2026 तक इसके परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है और उत्तर प्रदेश में एक नई उत्पादन सुविधा प्रति वर्ष 100 मिसाइलों का निर्माण करेगी। भारत न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर हथियारों का एक प्रमुख निर्यातक बनने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। दुनिया भर के देश इस परिवर्तनकारी तकनीक को खरीदने के इच्छुक हैं।






