यूरोप में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, युद्धविराम की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं। रूस और यूक्रेन दोनों ही हमले तेज कर रहे हैं। रूस ने पिछले 24 घंटों में यूक्रेन पर भीषण हमले किए हैं, जिससे नाटो में आक्रोश है। नाटो ने यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी देने की बात कही है, अन्यथा यूरोप में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जिससे रूस के साथ टकराव की स्थिति बन सकती है। रूस ने भी नाटो का मुकाबला करने के लिए गठबंधन बनाना शुरू कर दिया है।
हर दिन रूस के हमले बढ़ रहे हैं और यूक्रेन में तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं, लेकिन न तो रूस हमले रोक रहा है और न ही यूक्रेन पीछे हटने को तैयार है। ऐसे में सवाल है कि युद्धविराम होगा या नहीं, सुरक्षा गारंटी मिलेगी या नहीं, और युद्ध रुकेगा या नहीं। यह सवाल पूरे यूरोप की सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि अगर यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी नहीं मिली, तो यह पुतिन की जीत होगी। डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने से इनकार कर दिया है, लेकिन बैकडोर से मदद जारी रखने की बात कही है। यूरोपीय देश मिलकर सुरक्षा गारंटी का नया फॉर्मूला बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रूस इसे भी मानने से इनकार कर रहा है, जिससे ऐसा लगता है कि रूस कुछ बड़ा करने की तैयारी में है।
रूस का अगला निशाना बाल्टिक देश, लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया के साथ-साथ नॉर्डिक देश, नॉर्वे, फिनलैंड और स्वीडन हो सकते हैं। यूरोपीय देश ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं ताकि युद्धविराम हो सके, लेकिन रूस टकराव के लिए तैयार दिख रहा है, यहां तक कि एटमी युद्ध के लिए भी। पुतिन ने गठबंधन बनाना शुरू कर दिया है, जबकि यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी दिलाने के लिए कई यूरोपीय देश एकजुट हैं, जिसका रूस विरोध कर सकता है। जेलेंस्की के एक बयान के बाद से यूरोप में समीकरण बदल रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी चाहिए, तभी युद्धविराम पर तीसरी वार्ता संभव है।
अमेरिका ने इस तरह की गारंटी से इनकार कर दिया है, लेकिन दूसरे नाटो देश यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी का समर्थन कर रहे हैं। नाटो देश मिलकर अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं। जेलेंस्की एक उच्च अधिकारियों की टीम को अमेरिका भेज रहे हैं, जो ट्रंप के विशेष दूत से मुलाकात करेंगे। ट्रंप के रुख पर निर्भर करेगा कि यूरोप में विनाश का नया दौर शुरू होता है या नहीं। फ्रांस और जर्मनी ने कहा है कि हालात तीसरे विश्वयुद्ध जैसे हो सकते हैं। जर्मनी के चांसलर का बयान है कि यूक्रेन कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और पूरा यूरोप उसके साथ है।