भारत की कूटनीतिक ताकत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को परेशान करने वाली है। यह ताकत जापान से लेकर चीन तक आंकड़ों, विजन और समझौतों में दिखाई दे रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के साथ टैरिफ दादागिरी करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को यह बात चुभने वाली है। दो दिन के जापान दौरे के बाद, प्रधानमंत्री मोदी चीन पहुंच चुके हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक मंच पर मिलने वाले हैं।
आइये, डील, कूटनीति और फैसलों वाली 3D कूटनीति को आसानी से समझते हैं। यह भी समझते हैं कि ट्रंप के टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत कैसे कूटनीतिक जाल बिछा रहा है और अमेरिका के व्यापारिक वर्चस्व को कम करने के लिए कैसे नए रास्ते तलाश रहा है।
चीन के तियानजिन में जल्द ही एससीओ शिखर सम्मेलन होने वाला है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी चीन पहुंच चुके हैं, जिसका मतलब है कि मंच तैयार है, और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अब बस उस पल का इंतजार है जब प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन एक साथ होंगे।
इस मिलन से अमेरिका को जलन होने वाली है। भारत, चीन और रूस के रिश्तों का यह राउंड टेबल, दुनिया के लिए, खासकर अमेरिका के लिए, एक बड़ा संदेश होगा। एससीओ में कूटनीति की मेज पर क्या-क्या होगा? इसे 10 बिंदुओं में समझें:
1. चीन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक एससीओ शिखर सम्मेलन होगा।
2. एससीओ शिखर सम्मेलन चीन के तियानजिन शहर में होगा।
3. इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ होंगे।
4. रविवार को प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की मुलाकात होगी।
5. द्विपक्षीय वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
6. बताया जा रहा है कि टैरिफ, ट्रेड सहित कई मुद्दों पर बात हो सकती है।
7. 1 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की मुलाकात होगी।
8. एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन ने एक बड़ा बयान दिया है।
9. पुतिन ने कहा है कि एससीओ के देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे।
10. पुतिन ने यह भी कहा है कि एससीओ के देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
ट्रेड के नाम पर नहीं चलेगी दादागिरी
इस शिखर सम्मेलन से अमेरिका को यह बताने की कोशिश की जाएगी कि दुनिया अब कारोबार और ट्रेड के नाम पर दादागिरी से नहीं चलेगी, क्योंकि भारत, रूस और चीन दुनिया की 3 बड़ी शक्तियां हैं। सवाल है कि क्या अब पुराने संघर्षों को पीछे छोड़कर भारत और चीन दोस्ती की राह पर आगे बढ़ेंगे? यह सिर्फ समझौतों और कूटनीति का मंच नहीं है, बल्कि ट्रंप के लिए एक संदेश, सबक और सीख है… ये डील, कूटनीति और फैसले हर तरह से ट्रंप को चुभने वाले हैं।
भारत, रूस और चीन खोजेंगे टैरिफ की काट
एससीओ शिखर सम्मेलन पर अमेरिका की नजर रहेगी, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब टैरिफ को लेकर माहौल बिगड़ा हुआ है। ऐसे में संभव है कि भारत, रूस और चीन मिलकर अमेरिका के टैरिफ युद्ध का हल ढूंढें। अमेरिका इस सम्मेलन में नहीं है, लेकिन ट्रंप के करीबी दोस्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। बीजिंग इस हफ्ते दो बड़े आयोजनों का गवाह बनने जा रहा है।
चीन ने 26 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया
पहला आयोजन तो एससीओ शिखर सम्मेलन है। इसके बाद बीजिंग में विजय दिवस परेड भी होने वाली है, जिससे भारत दूर रहेगा, लेकिन 26 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे। बीजिंग में विजय दिवस परेड के लिए चीन ने 26 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों को आमंत्रित किया है। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान भी शामिल होंगे।
परेड में शक्ति प्रदर्शन करेगा चीन
इस परेड में चीन 100 से अधिक लड़ाकू विमान, मिसाइलों और टैंक के साथ शक्ति प्रदर्शन करेगा। दरअसल, चीन की यह विजय परेड द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान पर जीत की याद से जुड़ी है। भारत जापान को अपना करीबी साझेदार मानता है। प्रधानमंत्री मोदी जापान दौरे के बाद ही चीन दौरे पर गए हैं। ऐसे में उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों का संतुलन बनाया है।
भारत और जापान के बीच कई अहम समझौते
भारत और जापान के बीच कई अहम समझौते भी हुए हैं, जिनका जिक्र जरूरी है। जापान से ऐसी तस्वीरें आई हैं जो दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की गवाह हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जापान दौरे के दौरान यह भी कहा था कि जापान तकनीक का हब है और भारत टैलेंट का हब है। इसका एक सबूत देखने को मिला जब दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की बुलेट ट्रेन में सफर किया। उनके साथ जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा भी मौजूद थे।
बुलेट ट्रेन से जुड़ी खास बात
जापान की E10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन की रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा है। विशेष बात यह है कि जापान की E10 शिंकानसेन ट्रेन को भारत में भी लाने की तैयारी हो रही है। भारत और जापान इस एडवांस बुलेट ट्रेन को एक साथ पटरी पर उतारने की तैयारी में हैं। भारत में मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे हाई स्पीड कॉरिडोर पर इसे चलाया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान सरकार भारत को 2 बुलेट ट्रेन भी गिफ्ट करेगी।
भारत और जापान की चंद्रयान-5 वाली पार्टनरशिप
भारत और जापान की दोस्ती का एक सबूत चंद्रयान-5 वाली पार्टनरशिप भी है। भारत और जापान में समझौते हुए हैं, जिसके तहत जापान के रॉकेट से चंद्रयान-5 लॉन्च होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी का जॉइंट ऑपरेशन होगा।
बात करें चंद्रयान-5 मिशन की प्रमुख विशेषताओं की, तो इस मिशन को जापानी एजेंसी के H3-24L प्रक्षेपण यान के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा। इसरो कुछ विशिष्ट वैज्ञानिक उपकरण भी विकसित करेगा। चंद्रयान-5 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक प्रस्तावित चंद्र मिशन है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग करना और वहां वैज्ञानिक अध्ययन करना है।