अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने टिप्पणी की है कि अमेरिका भारत पर टैरिफ लगाकर ऐसा व्यवहार कर रहा है मानो वह ‘सख्त आदमी’ हो, लेकिन वास्तव में वह खुद के लिए ही मुसीबत खड़ी कर रहा है। उनका मानना है कि ट्रंप इस कदम से ब्रिक्स को पश्चिम के आर्थिक विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं।
वोल्फ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। उन्होंने अमेरिका की इस हरकत को एक चूहे द्वारा हाथी को घूंसा मारने जैसा बताया।
उन्होंने रशिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर अमेरिका भारत के लिए अपने दरवाजे बंद कर देता है, तो भारत अपने सामान बेचने के लिए दूसरे बाजार ढूंढेगा, जिससे ब्रिक्स देशों को और मजबूती मिलेगी। वोल्फ ने रूस के कच्चे तेल को बेचने के लिए अन्य बाजार खोजने का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि अगर चीन, भारत, रूस और ब्रिक्स को लिया जाए, तो इन देशों का वैश्विक उत्पादन में 35% हिस्सा है, जबकि जी7 का हिस्सा घटकर लगभग 28% रह गया है।
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, जिसका उद्देश्य पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व का मुकाबला करना है। ब्रिक्स डॉलर को चुनौती देने के लिए विकल्प भी तलाश रहा है। ब्रिक्स की स्थापना 2009 में हुई थी, जिसमें भारत, चीन, रूस और ब्राजील संस्थापक सदस्य थे।
ट्रंप ने कई बार ब्रिक्स को कमतर आंका है और फरवरी में यहां तक कहा था कि ब्रिक्स खत्म हो चुका है। उन्होंने ब्रिक्स द्वारा डॉलर के बजाय एक साझा मुद्रा बनाने की कोशिश करने पर 100% टैरिफ लगाने की भी धमकी दी थी।
वोल्फ ने बताया कि भारत का अमेरिका के साथ सोवियत संघ के समय से ही रिश्ता रहा है। अमेरिका इस तरह व्यवहार कर रहा है जैसे वह दुनिया का सबसे ताकतवर व्यक्ति है, जबकि वास्तव में वह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है।