अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत के साथ रिश्ते फिलहाल सहज नहीं हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टेक्सास में आयोजित हाउडी मोदी रैली में शामिल हुए थे, और इसके कुछ महीने बाद गुजरात में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें उनका भव्य स्वागत हुआ था।
लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ऐसा क्या हुआ कि भारत के साथ रिश्तों में तल्खी आ गई? आइए जानते हैं कि ट्रंप और PM मोदी के बीच रिश्ते क्यों और कैसे बिगड़े:
1. सीजफायर का श्रेय: न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, G7 शिखर सम्मेलन से लौटते समय ट्रंप ने PM मोदी से बातचीत में दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का श्रेय उन्हीं को जाता है। जबकि मोदी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का इससे कोई लेना-देना नहीं है, ट्रंप ने फिर भी कई बार इस दावे को दोहराया।
2. नोबेल पुरस्कार की नाराजगी: ट्रंप ने मोदी से कहा कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने वाला है और भारत को भी ऐसा करना चाहिए। भारत ने ऐसा नहीं किया और ट्रंप नाराज हो गए।
3. कनाडा में मुलाकात से इनकार: कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान, मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत होनी थी, लेकिन नहीं हो पाई। ट्रंप ने मोदी से अमेरिका आने के लिए कहा, लेकिन मोदी ने इनकार कर दिया।
4. कश्मीर पर मध्यस्थता से इनकार: मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी।
5. भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहना: ट्रंप ने भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहा और भारतीय व्यापार नीतियों को घटिया बताया, जिसके बाद भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया।
6. अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में कटौती नहीं: भारत ने अमेरिकी फार्मिंग और डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोलने के अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया और घरेलू किसानों के हितों को प्राथमिकता दी।
7. रूसी तेल की खरीद पर टैरिफ: अमेरिका ने भारत पर 27 अगस्त से 50% टैरिफ लगाया, जिसमें रूस से तेल खरीदने के कारण 25% पेनल्टी भी शामिल है। भारत ने इसे राष्ट्रीय हित में बताते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी।