23 May 2019

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी का काला चि

संवैधानिक स्वतंत्र संस्थाओं में कांग्रेस वामपंथियों की घुसपैठ एक साजिश के तहत।
लवासा परिवार का चिदंबरम के माध्यम से व्यावसायिक समीकरण : बलरामपुर चीनी मिल्स प्राइवेट लिमिटेड कॉमन वेल्थ गेम स्कैम मौनेट इस्पात एंड एनर्जी  से भ्रष्ट संबंध?
इस पर चर्चा करते समय मुझे सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों द्वारा जनवरी १२ २०१८ को  की गई प्रेस वार्ता का स्मरण हो रहा है।
उक्त चार जजों में से एक जस्टिस रंजन गोगोई  अभी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं। वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के सुपुत्र हैं। दूसरे जस्टिस चेलमेश्वर का झुकाव वामपंथ से रहा है वे  कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा के मित्र हैं। प्रेस वार्ता समाप्ति के बाद चेलमेश्वर के निवास में डी राजा को देखा भी गया था।
चिदंबरम के प्रिय चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और उसकी पत्नी का राज!
चुनाव आयोग के एक सदस्य अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के खिलाफ हमला बोला था। उसके बाद से वह पेटीकोट पत्रकारों और विपक्ष की आखों के तारे बन गये थे। असल में अशोक लवासा पी चिदंबरम के खास नौकशाह हैं। पूर्व में पर्यावरण और वित्त सचिव रहते हुए उन्होंने अपनी पत्नी को 12 कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टरर्स में शामिल कराया था।
चुनाव में हार की आशंका से हताश कांग्रेस ने अशोक लवासा सहित पूर्व चुनाव आयुक्त एस.वाई कुरैशी और नवीन चावला को भी अपने पक्ष में उतार दिया है। यह सब कांग्रेस द्वारा विपक्ष की अन्य पार्टियों और पेटीकोट पत्रकारों के साथ मिलकर लोकतंत्र के अपहरण के प्रयास के लिए किया जा रहा है। एक्जिट पोल ने तो कांग्रेस को और भी बौखल दिया है और कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तो यह तक बोल दिया कि मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को जानबूझ कर जिताया गया था ताकि आम चुनाव में ईवीएम मैनेज किया जा सके।
अशोक लवासा और उसकी पत्नी को लेकर श्चद्दह्वह्म्ह्वह्य वेब और वकील प्रशांत पटेल ने खुलासा किया है।
ओपी इंंडिया और परफार्म इंडिया में इसकी विस्तार से चर्चा की गई है।
इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के माध्यम से चुनाव आयोग को बदनाम करने की उसी प्रकार से साजिश रची गई है जैसे  जनवरी  २०१८ में उस समय के चीफ जस्टिस को बदनाम करने की साजिश रची गई थी?

Leave comment