Lok Shakti

Nationalism Always Empower People

गिरिडीह में सदर अस्पताल और थानों की लापरवाही, समय पर नहीं मिल पा रही पोस्टमार्टम रिपोर्ट

Giridih: गिरिडीह में शव का पोस्टमार्टम और उसका रिपोर्ट सिर्फ सदर अस्पताल ही निर्गत करती है. लेकिन पिछले कुछ महीनों से हालात ऐसे है कि जिले के कई थाने वक्त पर ना तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही अस्पताल से ले जा रहे है, और ना ही अस्पताल प्रबंधन किसी थानों को वक्त पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट निर्गत कर पा रहा है. ऐसा क्यों हो रहा है ये तो स्पष्ट नही हो पाया है. इस संवेदनशील मामले में कोई कुछ खुलकर नही बोलना चाहता. गोलमटोल जवाब देकर सिर्फ पल्ला ही झाड़ रहे है. लिहाजा, अबतक सदर अस्पताल में 30 रिपोर्ट पेडिंग पड़ चुके है. मामले का खुलासा दो दिन पहले गिरिडीह नगर भवन में हुए दिशा यानी, जिला निगरानी, समवंय समिति की बैठक में हुआ.

दिशा में इस मामले को जमुआ विधायक केदार हाजरा और पीरटांड के एक जनप्रतिनिधी ने उठाया था. जमुआ विधायक ने अस्पताल और जमुआ पुलिस की लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि जमुआ के अजय रजक के मौत का पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक साल बाद भी जमुआ थाना पुलिस को नहीं मिला है. वहीं पीरटांड के जनप्रतिनिधी ने पीरटांड थाना के सैमूल मंराडी की मौत का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि अस्पताल से अबतक सैमूल के मौत का पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीरटांड थाना पुलिस को नहीं मिल पाया है.

दो दिन बाद अब मामला सामने निकल कर आया कि अजय रजक का पोस्टमार्टम रिपोर्ट जमुआ थाना के एसआई सुधीर सिंह दो साल पहले ही हासिल कर चुके है. जिनका रिसिविंग साईन अस्पताल के रजिस्ट्रर में नजर आया. इसी प्रकार पीरटांड के थाना के एक पुलिस पदाधिकारी द्वारा ही सैमूल मंराडी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का रिसिविंग पिछले साल सांतवे महीने में पाया गया. लेकिन दोनो ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक थाने तक नही पहुंच पाया है. जबकि पोस्टमार्टम के अवधी के एक सप्ताह बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट थानों तक पहुंचने का नियम है. क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधिकार फाइनल चार्जशीट बनते है और कोर्ट में जमा होते है.

बहरहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का यह दो मामला तो सिर्फ बानगी है. लेकिन हकीकत यही है कि जिले के थानों तक हत्या, सड़क हादसा और दहेज हत्या का पोस्टमार्टम रिपोर्ट वक्त पर पहुंच जाए. ऐसा फिलहाल जिले में पिछले कई महीने से नही हो पा रहा है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या और सड़क हादसे से जुड़े मामले में प्रभावित परिजनों को इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभाता है. लिहाजा, समझा जा सकता है कि इतने महत्पूर्ण दस्तावेज को लेकर सदर अस्पताल से लेकर जिले के थानों में किस कदर लापरवाही की जा रही है. वैसे यहां जिक्र करना जरूरी होगा की हालात सुधारने के लिए ही एक साल पहले जिलास्तर पर एक पुलिस पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ती सदर अस्पताल में सिर्फ इसलिए किया गया कि थानों को वक्त पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल जाएं. लेकिन कोई सुधार नहीं हो पाया. इधर मामले में सिविल सर्जन डा. शिवप्रसाद मिश्रा से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि जल्द ही बैठक कर इसके समाधान का प्रयास किया जाएगा.

इसे भी पढ़ें: मांग पूरी नहीं होने पर 9 मार्च से पुलिस मेंस एसोसिएशन का आंदोलन

 

Like this:

Like Loading…