30 March 2019

जज ने फैसले में कहा, आरएसएस की सदस्यता किसीको सांप्रदायिक नहीं बनाती

आज केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि एनआईए स्वामी असीमानंद और दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप को साबित करने में नाकाम रही। जिस तरह से समझौता ब्लास्ट केस में कुछ आरोपियों का अपराधी घोषित करने की कोशिश की गई उसकी दावों की पोल खुल गई। वित्त मंत्री ने कहा कि 2007 और उसके बाद जिस तरह से जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया उससे साफ है कि कुछ खास संगठनों को बदनाम करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी जिस तरह से मामले को आगे बढ़ाती गई उससे साफ है कि सबकुछ ठीक तरह से नहीं चल रहा था।

यहॉ यह उल्लेखनीय है कि  कुछ वर्ष पहले भारत में हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद जैसे शब्द गढ़कर हिन्दुओं को बदनाम करने की बहुत बड़ी साजिश की गयी थी, कई हिन्दुओं को आतंकवादी बोलकर जेल में डाल दिया गया, साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित जैसे ईमानदार और देशभक्त लोगों को आतंकवादी बोलकर जेल में डाल दिया।

बीजेपी नेता सुब्रमनियम स्वामी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने साजिश के तहत यह कांड करवाया था और हिन्दुओं को बदनाम करना चाहा था, राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और पी चिदंबरम को अरेस्ट करके इनकी पूछताछ होनी चाहिए और मामले में सच बाहर आना चाहिए।

कांगे्रस की हिन्दुओं को बदनाम करने की यह साजिश पंडित नेहरू के समय से ही चली रही है।

पंडित नेहरू से लेकर अन्य सभी वंशज अपने–  अपने शासनकाल में वोटबैंक पॉलिटिस बांटो  और राज करो की नीति पर चलते रहे हैं।  पंडित नेहरू ने अपने नाम के साथ पंडित रहने  दिया था। उन्होंने घोषित किया था कि वे  घटनावश हिन्दू हैं। शिक्षा से अंग्रेज और संस्कृति  से मुस्लिम हैं।  

कांग्रेस की सरकार ने हिन्दू आतंकवाद जैसे शद का गठन किया था। देश के तत्कालीन गृहमत्री शींदे ने सोनिया गांधी की उपस्थिति में इसका जिक्र किया था बाद में पी चिदंबरम ने भी इसे सेफरन टेरर कहकर हवा दी थी।

राहुल गांधी ने भी अमेरिकी राजदूत से कहा था कि उन्हें हिन्दू आतंकवाद से डर लगता है। लश्कर से भी अधिक खतरनाक हिन्दू आतंकवाद।  अब 17 अक्टूबर को कोर्ट के आदेश से कांगे्रस की साजिश बेनकाब हो गयी है और वह अभी वेंटीलेशन पर है।

जिस प्रकार से रावण ने ब्राम्हण का वेश धर सीता का हरण किया था उसी प्रकार से अब ये ही राहुल गांधी जनेऊधारी ब्राम्हण का वेश धरकर हिन्दुओं की गौरवशाली भारत की भगवा हिन्दू परंपरा को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। जिस प्रकार से भारतीय सेना का वेश धारण कर हमारी सेना में पाकिस्तानी आतंकवादी घुसपैठ करते हैं।

अब राहुल गांधी की इसी साजिश में भागीदार बनने का जानेअंजाने में प्रयास प्रियंका वाड्रा कर रही हैं। :  अयोध्या जाकर भी राम मंदिर नहीं जायेंगी प्रियंका वाड्रा

वोट के लिये पॉलिटिकल पर्यटन  – यहॉ यह उल्लेखनीय है कि राम लला के पट के ताले राजीव गांधी ने खुलवाये थे और वहीं से चुनाव प्रचार किया था।  इन्हीं राजीव जी ने सुप्रीम कोर्ट के शाहबानो केस को भी पलट दिया था अपने शासनकाल में मुस्लिमों के वोट पाने के लिये।

जेएनयू के टुकड़ेटुकड़े गैंग का आजादी के नारे लगाये जाने का समर्थन कर रहे छात्रों की पीठ थपथपाने के लिये राहुल गांधी पहुंच गये थे जेएनयू में और उनके साथ थे केजरीवाल तथा वामपंथी नेता।

इन सब तथ्यों से स्पष्ट है कि राहुल गांधी  देशविरोधी ताकतों के बलबूते पर किसी प्रकार से  साा हथियाना चाहते हैं। अब प्रश्र यह उठता है  कि कांग्रेस या पुन: देश को विभाजित करना  चाहती है? यहॉ यह उल्लेखनीय है कि पंडित नेहरू  और जिन्ना दोनों ने अपनेअपने देशों के प्रधान  शासक बनने की महत्वकांक्षा के कारण से देश का  बटवारा किये थे।  

>> इसे और अधिक स्पष्ट मैं यहॉ करना उचित  समझता हूं। यूपीए शासन में दो गृहमंत्री सुशील  शिंदे और पी. चिदंबरम हुए। दोनों ने ही हिन्दू  आतंकवाद, भगवा टेरर का झूठ फैलाया।

>> समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में पाकिस्तान के दो नागरिकों को पुलिस ने  गिरफ्तार किया था। हिन्दुओं को बदनाम करने  और पाकिस्तान को खुश करने के लिये समझौता  एसप्रेस और मालेगांव लास्ट के केस में निर्दोष  करनल पुरोहित और प्रज्ञा भारती को जेल में ठूंस  दिया गया।

>> यूपीए शासन तो चाहता था कि इस  केस में संघ प्रमुख मोहन भागवत जी को भी गिरफ्तार कर लिया जाए। परंतु उनका यह षडयंत्र सफल नहीं हो सका क्योंकि २०१४ में भाजपा की मोदी के नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बन गई।

हिन्दुओं को बदनाम कर मुस्लिमों के वोट प्राप्त करने की साजिश गांधी परिवार के इशारे पर यूपीए शासनकाल में योजनाबद्ध तरीके से रची गई थी।

>> पूर्व रॉ अधिकारी आर.एस.एन. सिंह का यह  कथन सही है कि 26/11 पूरा प्रीह्रश्वलैनेड हमला  था, कसाब पकड़ा गया होता तो हिन्दू आतंकी घोषित होता।  

चोर की दाढ़ी में तीनका झूठ कभी ना कभी जबान पर ही जाता है। इसे राहुल गांधी के गुरू सेम पित्रोदा ने कुछ दिनों पूर्व एयरस्ट्राईक पर सबूत मांगने के संदर्भ में दिया गया वक्तव्य है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था कि २६/११ हमले के बाद उस समय की सरकार ने एयरस्ट्राइक नहीं की तो अब पुलवामा हमले के बाद एयरस्ट्राइक कर कुछ लोगों के कारण पाकिस्तान को क्यों बदनाम किया जा रहा है।

इसी योजनाबद्ध षडयंत्र के कारण राहुल गांधी के दूसरे गुरू दिग्विजय सिंह ने उस पुस्तक का विमोचन किया था जिसमें कहा गया था कि २६/११ मुंबई हमला आरएसएस की साजिश है।

इसी क्रम मेें भगवा आतंक हिन्दू टेरर शब्द का गढऩा यूपीए शासनकाल में हुआ।

इसी कड़ी में अमेरिका में जाकर राहुल गांंधी ने जो वक्तव्य दिया था कहा था कि लश्कर से ज्यादा खतरा हिन्दू आतंक से है।

इसी झूठ को सत्य साबित करने के लिये एक षडयंत्र के तहत साध्वी प्रज्ञा भारती को गिरफ्तार किया गया।

शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को १३ वर्ष तक  बिना सबूत के जेल में रहना पड़ा।

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में भी निर्दाेष हिन्दू विभूतियो को यहॉ तक की सैन्य अधिकारी करनल पुरोहित को भी गिरप्तार कर फसाया गया।

इसी संदर्भ में प्रियंका वाड्रा की अयोध्या की  पॉलिटिकल पर्यटन यात्रा को भी देखा जाना चाहिये और सभी राष्ट्रवादी ताकतों को सतर्क रहने की आवश्यक्ता है।  

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