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कोर्ट फीस पर तकरार, अधिवक्ताओं का आंदोलन बरकरार

Ranchi : कोर्ट फीस वृद्धि वापस लेने की मांग को लेकर राज्यभर के अधिवक्ता दो दिनों से आंदोलन पर हैं. वे सरकार से कोर्ट फीस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. अधिवक्ता काउंसिल के निर्देश का पालन करते हुए खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखे हुए हैं. इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. लोग कोर्ट पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है. इसमें वकीलों का एक पक्ष सरकार के फैसले के खिलाफ है. वे फीस घटाने की मांग कर रहे हैं. वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो आंदोलन के विरोध में न्यायिक कार्यों में हिस्सा ले रहे हैं. शुभम संदेश की टीम ने इस मामले को गंभीरता से उठाया. वकीलों से बात कर उनके विचारों को सामने लाया.

रांची : 
काउंसिल की अपील दरकिनार कर सीएम संवाद में पहुंचे सैकड़ों वकील

सीएम आवास में शनिवार को मुख्यमंत्री-अधिवक्ता संवाद कार्यक्रम हुआ. इसमें स्टेट बार काउंसिल की अपील दरकिनार कर राज्य भर के विभिन्न एसोसिएशन के पदाधिकारी और झारखंड स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों के साथ अलग-अलग जिलों से आए अधिवक्ता शामिल हुए. संवाद कार्यक्रम में काउंसिल और अधिवक्ताओं द्वारा उठाई गई समस्याओं से मुख्यमंत्री अवगत हुए. उन्होंने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया. कार्यक्रम के बाद महाधिवक्ता एडवोकेट जनरल राजीव रंजन ने बताया कि अधिवक्ता समाज के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है. झारखंड गठन के बाद पहली बार राज्य के किसी मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बातचीत की.

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि वकीलों को ट्रस्टी कमेटी की तरफ से जितनी पेंशन राशि मिलती है, उतनी ही राशि सरकार भी देगी. यानी पेंशन की राशि अब दोगुनी हो जाएगी. अब तक किसी सरकार ने अधिवक्ताओं को वित्तीय सहायता नहीं की है. इसके साथ ही यह भी एलान किया गया है कि 5 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस हर अधिवक्ता और उसके परिवार को मिलेगा. 5 लाख का दुर्घटना बीमा भी दिए जाने का मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया. वहीं वकीलों के लिए हर जिले में एक मॉडर्न बार भवन कांप्लेक्स बनाने की योजना की भी मुख्यमंत्री ने सहमति दी है. उन्होंने बताया कि कोर्ट फीस का मामला अधिवक्ता कल्याण से जुड़ा नहीं है, फिर भी उसमें अमेंडमेंट का मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है.

मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम के बाद कई वकीलों ने सीएम का साथ सेल्फी भी ली. मुख्यमंत्री से सीधे रूबरू होकर अधिवक्ताओं में काफी उत्साह दिखा. सबसे ज्यादा उत्साह युवा अधिवक्ताओं में दिखा. अन्य राज्यों के आकलन के बाद एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट पर होगा फैसला : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड राज्य विधिज्ञ परिषद द्वारा अधिवक्ता (संरक्षण) कानून अधिनियमित करने का अनुरोध किया गया है. इस संबंध में देश के विभिन्न राज्यों से पत्राचार कर यह जानने का प्रयास किया गया है. वहां अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रवृत्त एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधान और उपबंध किस रूप में हैं. अन्य राज्यों के आकलन के बाद अधिवक्ता (संरक्षण) कानून पर फैसला लिया जाएगा.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह सच्चाई है कि राज्यभर के सक्रिय लगभग 30 हजार वकीलों में से दो- ढाई हजार वकीलों को छोड़ दें, तो बाकी की स्थिति दयनीय बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहला ऐसा मौका है, जब ‘’मुख्यमंत्री अधिवक्ता संवाद’’ कार्यक्रम आयोजित की गई है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यही है कि अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान संवाद के तहत किया जा सके.

रांची में वकीलों का पैदल मार्च न्यायिक कार्य प्रभावित

राज्य भर के वकीलों का कार्य बहिष्कार दूसरे दिन भी जारी है. झारखंड में कोर्ट फीस वृद्धि का निर्णय वापस लेने की मांग को लेकर वकीलों ने शनिवार को भी कार्य बहिष्कार किया. झारखंड हाईकोर्ट और रांची सिविल कोर्ट के वकीलों ने भी काउंसिल के निर्देश का पालन करते हुए खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखा. इसका असर न्यायिक कार्यों के निष्पादन पर साफ देखने को मिला. कोर्ट परिसर से लेकर अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाला गया मार्च : रांची सिविल कोर्ट के वकीलों ने कोर्ट परिसर से लेकर अल्बर्ट एक्का चौक पर शांतिपूर्ण मार्च निकाल कर सरकार से कोर्ट फीस में उचित संशोधन करने की मांग की. रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही के नेतृत्व में वकीलों ने पैदल मार्च किया. पैदल मार्च के दौरान सरकार के इस निर्णय के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. इस पैदल मार्च में रांची जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और अन्य वकील शामिल रहे. अल्बर्ट एक्का पहुंचकर वकीलों का यह प्रदर्शन खत्म हुआ.

बोकारो

संशोधित कोर्ट फीस विधेयक के विरोध में राज्यभर के वकील आंदोलनरत हैं. स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर बोकारो में भी वकीलों ने कार्य बहिष्कार किया. उन्होंने सरकार से कोर्ट फीस बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की. शुभम संदेश टीम ने उनसे बाततीच कर उनके विचार सामने लाए.

श्रीवास्तवसरकार हमारी मांगें मान ले, वर्ना आंदोलन जारी रहेगा

बोकारो बार एसोसिएशन के सचिव मृत्युंजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि झारखंड के सभी 37 बार एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने अपने आपको न्यायिक कार्य से अलग रखा है. झारखंड सरकार की उदासीनता के कारण 8 जनवरी को झारखंड स्टेट बार काउंसिल में सभी 37 बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और बार काउंसिल के सभी सदस्यों की बैठक होगी. कहा कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, अधिवक्ता वर्ग से लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक व विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की मांग और संशोधित कोर्ट फीस विधेयक वापस लेने की मांग को पूरा करने तक आंदोलन जारी रहेगा.

दयाशंकरकाफी दिनों से लंबित है एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट का मामला

बोकारो सिविल कोर्ट के अधिवक्ता दयाशंकर ने कहा कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट का मामला पहले से ही लंबित है. उसके बाद कोर्ट फीस में बढ़ोतरी कर गरीब तबके के लोगों को मुसीबत में डालने का काम किया गया है. फीस में कई गुना अधिक बढ़ोतरी होगी. खास कर जो सिविल का मामला है. ऐसे में गरीब तबके के लोग कोर्ट नहीं पहुंच सकेंगे. अधिवक्ता एसके शर्मा ने बताया कि सरकार ने कोर्ट फीस में बढ़ोतरी की है. इससे आम जनमानस को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. साथ ही इससे अधिवक्ता भी प्रभावित होंगे. पहले से ही एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की जा रही है.

साहूमनमाने तरीके से बढ़ाई गई कोर्ट फीस 

बोकारो सिविल कोर्ट के अधिवक्ता भगवान साहू ने कहा कि जिस तरह से सरकार ने मनमाने तरीके से कोर्ट फीस कई गुना बढ़ा दिया है, उससे गरीब लोगों पर बोझ बढ़ेगा. बिल्डर और भू-माफिया गरीबों का शोषण करना शुरू कर देंगे. फीस बढ़ जाने से भू-माफिया का राज्य कायम हो जाएगा. इसलिए कोर्ट फीस की बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेना चाहिए. बोकारो सिविल कोर्ट के अधिवक्ता पप्पू कुमार सिंह ने कहा कि कोर्ट फीस में बढ़ोतरी कर सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार को इसे अविलंब वापस लेना चाहिए. दो दिवसीय कलम बंद हड़ताल से सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

हजारीबाग
स्वरूपचंद जैनसरकार सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में विफल 

पूर्व पीपी रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरूपचंद जैन ने कहा कि सभी वकीलों के साथ वह भी तीन बिन्दुओं पर हड़ताल पर हैं. सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल रही है. अनाप-शनाप कोर्ट फीस बढ़ा दिया गया है. इससे अधिवक्ता ही नहीं, जनता भी प्रभावित है. गरीब लोग न्याय पाने से वंचित रह जाएंगे. हर व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट तो जा नहीं सकता. लॉयर्स प्रोटेक्शन पर भी सरकार गंभीर नहीं है.

कुणालकोर्ट फी में बढ़ोतरी से जनता-अधिवक्ता सब हलकान 

बार एसोसिएशन हजारीबाग के कार्यकारिणी सदस्य सह मीडिया प्रभारी कुणाल कुमार ने कहा कि कोर्ट फीस में बढ़ोतरी से जनता-अधिवक्ता सब हलकान हैं. इससे त्वरित और सुलभ व सस्ता न्याय नहीं मिल पाएगा. गरीब लोग कोर्ट का भारी-भरकम फीस कहां से भर पाएंगे. सरकार को इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है. राज्य सरकार की ओर से कोर्ट फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी के विरुद्ध अधिवक्ताओं की यह दो दिवसीय अनिश्चितकालीन हड़ताल है.

बबलू कुमारसरकार की वजह से पेन डाउन हड़ताल पर हैं सारे अधिवक्ता  

अधिवक्ता बबलू कुमार ने कहा कि आज वकील राज्य सरकार की वजह से पेन डाउन हड़ताल पर हैं. सरकार ने कोर्ट फीस में इतनी बढ़ोतरी कर दी है कि आमजनमानस को केस लड़ने लायक नहीं छोड़ा. छोटे-छोटे केस में भरी भरकम फीस जनता कहां से वहन कर पाएगी. इसका असर वकीलों पर पड़ेगा. केस नहीं होंगे, तो वकीलों के जीवन-यापन में भारी मुसीबतें आएंगी. ऐसे में सस्ता और सुलभ न्याय का सरकार का वादा भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा.

फणी कुमारसिर्फ साधन संपन्न लोगों के लिए ही बचा न्याय 

अधिवक्ता फणी कुमार यादव ने कहा कि कोर्ट फी में बेतहाशा बढ़ोतरी से अब सिर्फ साधन संपन्न लोग ही न्याय ले पाएंगे. पैसे के अभाव में गरीब न्याय पाने से भी वंचित रह जाएंगे. झारखंड राज्य बार काउंसिल के निर्देशानुसार झारखंड में बेतहाशा कोर्ट फी में बढ़ोतरी, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट नहीं लागू करने, बजट में अधिवक्ता कल्याण के लिए निधि आवंटन नहीं करने व अन्य मांगों को लेकर सभी वकील हड़ताल पर हैं.

गौतम कुमार महतोअब गरीबों को न्याय के लिए भी सोचना होगा 

अधिवक्ता गौतम कुमार मेहता ने कहा कि अब गरीबों को न्याय के लिए सोचना होगा. कोर्ट का महंगा फीस गरीब कहां से वहन कर पाएंगे. अगर गरीब केस नहीं लड़ पाएंगे, तो उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा. ऐसे में माफिया राज बढ़ेगा. जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ होने लगेगी. अपराधियों पर अंकुश लगाना आसान नहीं होगा. कानून से ही अपराधियों में दहशत रहता है. सरकार को यह निर्णय वापस लेना चाहिए.

आशीषगरीबों का गला काटने वाला निर्णय लिया है सरकार ने 

बार एसोसिएशन बरही के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष ओझा ने राज्य सरकार की ओर से कोर्ट शुल्क में अचानक किए गए वृद्धि को तानाशाह बताते हुए जनता के लिए गला काटने वाला निर्णय बताया है. कोर्ट शुल्क ने वृद्धि से अब लगभग दस से 15 फीसदी अधिक शुल्क देना होगा. इससे राज्य की गरीब जनता शुल्क के अभाव में मजबूरन गांव में ही फैसला करवाने के लिए विवश हो जाएंगे.

सिन्हाजंगलों में फैसला होगा नक्सली राज भी बढ़ेगा गरीब त्रस्त होंगे 

एसोसिएशन के युवा अधिवक्ता सौरभ सिन्हा ने बताया कि एक बार फिर जंगलों में फैसला होगा, नकल राज बढ़ेगा, गरीब त्रस्त होंगे. उन्होंने कहा कि काउंसिल के निर्देशानुसार बरही बार एसोसिएशन के सदस्यों ने राज्य सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करते हुए शुक्रवार और शनिवार को कलमबद्ध सांकेतिक हड़ताल किया है. काउंसिल के निर्णयानुसार अधिवक्ता आगे की रणनीति तय करेंगे.

धनबाद

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर धनबाद बार एसोसिएशन के तमाम अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रखा. अपनी चट्टानी एकता का परिचय देते हुए सभी अधिवक्ताओं ने काम बंद रखा.

राधेश्याम गोस्वामीअधिवक्ताओं की चट्टानी एकता बरकरार 

स्टेट बार काउंसिल के स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन राधेश्याम गोस्वामी व बार काउंसिल के मेंबर प्रयाग महतो ने कहा कि अधिवक्ताओं की एकता को सरकार नहीं तोड़ सकती. धनबाद बार एसोसिएशन कोर्ट फीस में वृद्धि को वापस लेने का आग्रह किया है. ग्रामीणों को सुलभ व सस्ता न्याय मिले, इसके लिए जरूरी है कि कोर्ट फीस में बढ़ोतरी को वापस लिया जाए. बार काउंसिल कीस्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन व धनबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि सभी अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रख चट्टानी एकता का परिचय दिया है. सरकार को अधिवक्ताओं की मांग पर विचार करना चाहिए .

पंकज प्रसादमांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा  

अधिवक्ता पंकज प्रसाद का कहना है कि धनबाद बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने झारखंड बार काउंसिल के निर्देश पर खुद को न्यायिक कार्यो से अलग रखा. अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो आंदोलन जारी रहेगा. वहीं धनबाद बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र कुमार ने कहा कि झारखंड स्टेट बार काउंसिल हमारी पेरें बॉडी है. उसके निर्देश का पालन किया जाएगा. कोर्ट फीस में वृद्धि न आम लोगों के हित में है न अधिवक्ताओं के हित में. सरकार को अधिवक्ताओं की मांग पर शीघ्र विचार करना चाहिए. अधिवक्ताओं ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. अब आरपार की लड़ाई होगी.

अमरेंद्र सहायमांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रखेंगे 

धनबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र सहाय कहते हैं कि काउंसिल के निर्देश पर धनबाद के तमाम अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्य से अलग रखा है. काउंसिल के निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. जाहिर है सरकार ने मांगों पर विचार नहीं किया तो आंदोलन थमनेवाला नहीं है. एसोसिएशन से जुड़े मुकुल कुमार ने कहा कि अधिवक्ताओं ने चट्टानी एकता का परिचय दिया है. काउंसिल का आगे जैसा निर्देश होगा, वैसा काम करेंगे. सरकार को अपनी हठधर्मिता त्याग कर मांगों पर विचार करना चाहिए. कोर्ट फीस में वृद्धि से किसी का भला नहीं होनेवाला है.

गिरिडीह
सिंहकोर्ट फीस बढ़ोतरी का विधेयक लाकर सरकार ने गलत किया

गिरिडीह व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता मिथिलेश कुमार सिंह का कहना है कि विधेयक लाकर राज्य सरकार ने गलत निर्णय लिया है. कोर्ट फीस में 2 से 6 गुना वृद्धि होने पर गरीब न्याय पाने से वंचित रह जाएंगे. दीवानी मुकदमा लड़ना गरीबों के लिए मुश्किल हो जाएगा. गरीब कोर्ट फीस जमा नहीं कर पाएंगे.

आनंदसरकार के निणर्णय से गरीबों पर आफत, कैसे न्याय मिलेगा 

गिरिडीह व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता आनंद गोपाल का कहना है कि विधेयक के कारण गरीबों के लिए न्याय पाना महंगा हो गया है. सिविल मामले में जिस प्रकार फीस वृद्धि की गई है उससे गरीबों को परेशानी होगी. सरकार विधेयक पर पुनर्विचार कर इसे वापस ले.

मोतीलालराज्य सरकार ने गरीबों के लिए रास्ता बंद कर दिया है

गिरिडीह व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता मोतीलाल त्रिवेदी का कहना है कि सरकार पूर्व की स्थिति बहाल करे. न्याय की आस में लोग कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं. राज्य सरकार ने विधेयक लाकर गरीबों के लिए न्यायालय का दरवाजा बंद कर दिया है.

सुलभ न्याय पर डाका : चुन्नूकांत

गिरिडीह अधिवक्ता संघ के महासचिव चुन्नूकांत ने विधेयक को सस्ता व सुलभ न्याय पर डाका बताया. कहा कि राज्य सरकार सस्ता व सुलभ न्याय का वादा तो करती है लेकिन निभाती नहीं. कोर्ट फीस में वृद्धि होने से गरीब न्याय नहीं पा सकेंगे.

राज्य सरकार को झुकना ही होगा:मुनेश्वर

अधिवक्ता मुनेश्वर कुमार मुनि ने बताया कि विधेयक से गरीब तबके पर असर पड़ेगा. इस मामले में राज्य सरकार को झुकना पड़ेगा. जनता के खिलाफ विधेयक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह गरीबों पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला है.

लातेहार
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग का पूर्ण समर्थन करते हैं : सुनील कुमार
सुनील कुमार

कोर्ट फीस वृद्धि वापस लेने की मांग को लेकर राज्यभर के अधिवक्ता दो दिनों से आंदोलन पर हैं. वे सरकार से कोर्ट फीस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. अधिवक्ता काउंसिल के निर्देश का पालन करते हुए खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखे हुए हैं. इसमें लातेहार सिविल कोर्ट के वकीलों ने स्टेट बार काउंसिल के निर्देश का पालन करते हुए शनिवार को खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखा. इसका असर न्यायिक कार्यों के निष्पादन पर साफ देखा गया. अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजमणी प्रसाद ने कहा कि झारखंड के अधिवक्ताओें के हितों की लागतार अनदेखी की जा रही है. कोर्ट फीस वृद्धि के मामले को लेकर वरीय अधिवक्ता सुनील कुमार ने कहा कि कोर्ट फीस और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग का पूर्ण समर्थन करते हैं.

वरीय अधिवक्ता लाल अरविंद नाथ शाहदेव ने कहा कि जो अधिवक्ता दूसरों को न्याय दिलवाते हैं उनकी सुरक्षा की कोई गांरटी नहीं है. यह विचारणीय विषय है. जबकि न्याय सभी के लिए सुलभ होना चाहिए. लेकिन कोर्ट फीस में वृद्धि से सबसे ज्याद तकलीफ आम और गरीब लोगों को होगी. इसकी चिंता सरकार को करनी चाहिए. इस वजह से पूरा न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है. इस पर विचार करने की जरूरत है. सरकार को चाहिए हठधर्मिता छोड़े और गरीबों के हितों का ध्यान मेंरखते हुए जल्द से जल्द कोटर्ट फीस बढ़ाने का फैसला वापस ले. साथ ही वकीलों के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट भी जल्द से जल्द लागू करे.

पलामू

सरकार को कोर्ट फीस बढ़ोतरी वापस लेना चाहिए : सूर्यपत सिंह

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अधिवक्ताओं का हड़ताल शनिवार को भी जारी रहा. बार काउंसिल के आह्वान पर राज्य सरकार के द्वारा कोर्ट फीस में मूल्य वृद्धि के खिलाफ पूरे राज्य के अधिवक्तागण दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे. इस दौरान उन्होंने स्वयं को न्यायिक कार्य से अलग रखा. इसके तहत पलामू जिले के अधिवक्ता भी हड़ताल पर हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्यपत सिंह ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के द्वारा कोर्ट फीस में की गई बढ़ोतरी गरीबों के विरुद्ध है. इस फीस वृद्धि का असर सीधे गरीबों पर पड़ेगा. सरकार को अविलंब कोर्ट फीस बढ़ोतरी को वापस लेनी चाहिए. आज झारखंड बार एसोसिएशन के साथ पूरे झारखंड के अधिवक्ता हड़ताल पर हैं.

अधिवक्ता रुचिर कुमार तिवारी ने कहा कि झारखंड सरकार के द्वारा कोर्ट फीस में बेतहाशा वृद्धि कर दिया गया है. ऐसा लगता है कि सरकार गरीबों को न्याय से दूर रखना चाहती है. मुकदमा लड़ने के लिए उन्हें भारी-भरकम कोर्ट फीस देनी होगी. इससे गरीब और कमजोर वर्ग के लोग न्यायालय में अपनी पैरवी नहीं कर पाएंगे. अधिवक्ता धीरेंद्र सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार के द्वारा कोर्ट फीस में बेतहाशा मूल्य का वृद्धि करना उचित नहीं है. बता दें कि पहले जहां पर 5 रुपए का टिकट लगता था, वहां अब शुल्क बढ़ने से 30 रुपए लगेगा. वहीं सिविल मामले में स्टांप शुल्क दोगुना से भी अधिक कर दिया गया है. ऐसी परिस्थिति में लोग पैसे के अभाव में अपने मुकदमे में पैरवी भी नहीं कर पाएंगे. इस परिस्थिति में गरीबों के लिए न्याय प्रक्रिया में भाग लेना मुश्किल होगा.

चांडिल

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्प्री मांग लंबे से की जा रही है: बद्री साव

झारखंड में कोर्ट फीस वृद्धि वापस लेने की मांग को लेकर चांडिल अनुमंडल बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने शनिवार को दूसरे दिन भी कार्य का बहिष्कार किया. स्टेट बार काउंसिल के निर्देश पर पूरे राज्य के अधिवक्ताओं का आंदोलन शनिवार को भी जारी रहा. अधिवक्ताओं ने काउंसिल के निर्देश का पालन करते हुए खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखा. इसका असर न्यायिक कार्यों के निष्पादन पर साफ देखने को मिला. चांडिल के अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार पर खुलकर अपने विचार रखे.
उन्होंने कहा कि कोर्ट फीस वृद्धि को वापस लेने और एडवोकेट एक्ट की मांग को लेकर राज्य भर के वकील एकजुट हैं. अधिवक्ता इस मूड में हैं कि यह लड़ाई मांगे पूरी होने तक जारी रखी जाए. कहा कि चांडिल अनुमंडल न्यायालय के अधिवक्ताओं के कोर्ट की कार्यवाही से दूर रहने से अदालत की कार्यवाही पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है.

वहीं अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से दूर रहने का खामियाजा आम जनता को भी उठाना पड़ रहा है. इस दौरान कई फरियादी दूर-दराज के इलाकों से अपने केस की सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा. वहीं चांडिल अनुमंडल न्यायालय में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बद्री प्रसाद साव, महेंद्र कुमार महतो, देवाशीष कुंडू, संजय कुमार साह, डा. प्रह्लाद महतो, मृत्युंजय महतो, अशोक कुमार झा, असीत चक्रवर्ती, विश्वनाथ कालिंदी, एसकेएस पातर, नवनीकांत सिंह सरदार और अजय कुमार गोप समेत अन्य कई अधिवक्ता न्यायालय पहुंचे.

रामगढ़

कोर्ट फीस वृद्धि वापस लेने की मांग को लेकर रामगढ़ के अधिवक्ताओं ने शनिवार को दूसरे दिन भी कार्य का बहिष्कार किया. स्टेट बार काउंसिल के निर्देश पर पूरे राज्य के अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी रहा. अधिवक्ताओं ने काउंसिल के निर्देश का पालन करते हुए खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखा. इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित रही. लोग कोर्ट पहुंचे, लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ा. इस मामले पर वकीलों ने अपनी मांगें रखीं.

द्वारिका प्रसादकोर्ट फीस में बढ़ोतरी से गरीबों की परेशानी बढ़ेगी 

रामगढ़ बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य द्वारिका प्रसाद कहते हैं कि कोर्ट फीस में बढ़ोतरी और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर राज्य भर के सभी वकील संकेतिक हड़ताल पर हैं. कोर्ट फीस में 3 से 4 गुना बढ़ोतरी कर दी गई है. इससे गरीब तबके के लोगों को सिविल केस लड़ने में काफी परेशानी होगी. उन्हें अत्यधिक पैसे खर्च करने होंगे. कहा कि 8 जनवरी को स्टेट बार काउंसिल द्वारा आयोजित बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी कि आंदोलन का अगला रूप क्या होगा.

नौशाद अहमदआखिर केस लड़ने को पैसे कहां से ला पाएंगे गरीब 

रामगढ़ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता नौशाद अहमद कहते हैं कि कोर्ट फीस बढ़ने से गरीबों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. सिविल केस में लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. गरीब तबके के लोग न्याय के लिए पहुंचते हैं. पैसे के अभाव में उन्हें उचित न्याय नहीं मिल पाएगा. सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है. स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर 2 दिनों से सांकेतिक हड़ताल के बाद 8 जनवरी को स्टेट बार काउंसिल द्वारा आयोजित बैठक में निर्णय लिया जाएगा कि अब आगे क्या करना है.

ऋषिगरीब तबका सिविल केस के लिए पैसे कहां से ला पाएगा

रामगढ़ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता ऋषि महतो कहते हैं कि एक गरीब तबका सिविल केस में ज्यादा पैसे कहां से जुटा पाएगा. पैसे के अभाव में उनको उचित न्याय नहीं मिल पाएगा. इसलिए सरकार को कोर्ट फीस विधेयक पर सोचने की आवश्यकता है. हमारी मांग है कि कोर्ट फीस कम किया जाए. एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए. फिलहाल 8 जनवरी को स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर आंदोलन को तेज करने को लेकर राज्यस्तरीय बैठक होगी. इसमें आगे की रूपरेखा तय की जायेगी.

अनुज गुप्ताव्यवस्था ऐसी हो कि सभी सुलभ न्याय मिल सके 

रामगढ़ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता अनुज गुप्ता कहते हैं कि कोर्ट न्याय का मंदिर होता है. सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि ऐसी व्यवस्था हो कि सभी को न्याय सुलभता से मिले. लेकिन कोर्ट फीस बढ़ने से न्याय प्रभावित होगी. सरकार को कोर्ट फीस विधेयक वापस लेना चाहिए. इससे गरीबों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा. जिनके पास पैसा नहीं होगा उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा. पैसे वालों के लिए कोर्ट कचहरी रह जाएगी. सरकार को इस पर सोचने की जरूरत है.

कोडरमा

 

 

 

 

कोर्ट फीस में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर वकीलों पर पड़ेगा : आत्मानंद

संशोधित कोर्ट फीस विधेयक के विरोध में राज्य के वकील आंदोलन पर हैं. इसे लेकर स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर कोडरमा के वकीलों ने भी कार्य का बहिष्कार किया. आंदोलन के जरिए उन्होंने सरकार को फीस वृद्धि से होनेवाले नुकसान से अवगत कराने की कोशिश की. इस पर उन्होंने खुलकर अपने विचार रखे. शुभम संदेश ने उनसे बात कर उनकी बातों को सामने रखा. इस मामले पर एडवोकेट आत्मानंद पांडेय ने कहा कि कोर्ट फीस में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर वकीलों पर पड़ेगा. इससे उनकी आमदनी कम होगी. इसका सीधा असर न्याय प्रणाली पर पड़ेगा. सरकार को चाहिए कि कोर्ट फीस में कटौती करे. पुरानी फीस को लागू करे.

एडवोकेट प्रदीप कुमार ने कहा कि अत्यधिक कोर्ट फीस वृद्धि का असर गरीबों पर पड़ेगा. हम सभी वकील चाहते हैं कि कोर्ट फीस कम रहे. केस लड़ने के लिए आनेवाले लोगों का काम सहूलियत से हो. एडवोकेट चंदन पांडेय ने कहा कि अत्यधिक फीस वृद्धि होने से सीधा असर जनता की जेब पर पड़ेगा. इसका असर न्याय प्रणाली पर पड़ेगा. लोग न्याय प्रणाली पर भरोसा करना छोड़ देंगे. हम सभी वकीलों की मांग है कि कोर्ट फीस को कम किया जाय. एडवोकेट बच्चन देव आर्य ने बताया कि अत्यधिक कोर्ट फीस वृद्धि को लेकर झारखंड बार काउंसिल के द्वारा हड़ताल किया गया है. सरकार को इस पर विचार करते हुए इसे जल्द से जल्द कम करना चाहिए.

 

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