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Editorial: दोनों ही ओर से युद्ध की तैय्यारी पीएम मोदी द्वारा मोर को दाना खिलाना और गांधी परिवार का कांग्रेस पर हमला

27 August 2020

.फैमिली रेस: सोनिया गांधी ने अब राहुल की मां को बनाया अध्यक्ष, सोशल मीडिया पर लोग ले रहे हैं मजे।

सोनिया गांधी परिवार और उनके अंधभक्तों का   कांग्रेस के २३ वरिष्ठ नेताओं के साथ युद्ध छिड़ा हुआ है।

>> अब इसमें एक नाम दिग्विजय सिंह का भी जुड़ गया है। उन्होंने आज कहा है कि राहुल गांधी ने पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ दिया था, लेकिन पार्टी पर उनका नियंत्रण बना रहा। इसके सबूत पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति में मिलता है। इसकी चर्चा इसी संपादकीय पृष्ठ में अलग से की जा रही है।

कांग्रेस में फ ूटा ‘चि_ी बमÓ : वरिष्ठ नेताओं  गुलाम नबी, सिब्बल, आनंद शर्मा आदि पर  अहमद पटेल ने बोला हमला।

डॉ मनमोहन सिंह ने पत्र को दुर्भाग्यपूर्ण बताया जबकि एके एंटनी ने पत्र को क्रूर कहा।

तात्पर्य यह है कि राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी को चीन और पाकिस्तान परस्त तो बनाया ही परंतु प्रधानमंत्री बनने की लालसा में उन्होंने भारत में भी अलगाववाद को बढ़ावा दिया। अभी सीएए के विरोध में जो हिंसात्मक आंदोलन हुआ उसकी जड़ में भी गांधी परिवार ही हैं। ऐसा करके वे भारत में गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न करना चाहते हैं। परंतु अब कांगे्रस पार्टी में ही गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है दोनों ही धड़े युद्ध की तैय्यारी कर रहे हैं। 

ङ्कह्य

जब सनातन धर्म का आस्थावान प्रधानमंत्री मोर को दाना खिलाता है तब इसके मायने क्या निकाले जाने चाहिए। शास्त्र कहते हैं कि मोर शिवपुत्र वीर कार्तिकेय के वाहन हैं, और कार्तिकेय हैं देवताओं के सेनापति। वीर कार्तिकेय को सनातन धर्म में युद्ध का देवता माना जाता है।

ऐसे में ज्योतिष नजरिये से जब भी मोर को दाना खिलाने की सलाह दी जाती है तब कार्तिकेय स्वामी को प्रसन्न किया जाता है ताकि किसी बड़े एक्शन से पहले युद्ध देवता का साथ मिल सके। देव सेनापति मंगल ग्रह कार्तिकेय स्वामी की ऊर्जा के ही प्रतिनिधि हैं। ऐसे में ज्योतिष नजरिये से कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री का मोर को दाना खिलाना किसी बड़े एक्शन से पहले महादेव पुत्र कार्तिकेय का आशीर्वाद मांगना है। देश भी इस आस में है कि मोर को दाना खिलाकर प्रधानमंत्री को भगवान कार्तिकेय का आशीर्वाद मिले और जल्द किसी बड़े एक्शन से देश का भला हो सके।

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। यह पक्षी जितना राष्ट्रीय महत्व रखता है उतना ही धार्मिक महत्व भी, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान मुरुगन या कहें कार्तिकेय का वाहन मोर है।

एक मान्यता अनुसार अरब में रह रहे यजीदी समुदाय (कुर्द धर्म) के लोग हिन्दू ही हैं और उनके देवता कार्तिकेय है जो मयूर पर सवार हैं। भारत में दक्षिण भारत में कार्तिकेय की अधिक पूजा होती है। कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है, जो शिव के बड़े पुत्र हैं।

कार्तिकेय का वाहन मयूर है। एक कथा के अनुसार कार्तिकेय को यह वाहन भगवान विष्णु ने उनकी सादक क्षमता को देखकर ही भेंट किया था। मयूर का मान चंचल होता है। चंचल मन को साधना बड़ा ही मुश्किल होता है। कार्तिकेय ने अपने मन को साथ रखा था। वहीं एक अन्य कथा में इसे दंभ के नाशक के तौर पर कार्तिकेय के साथ बताया गया है।

संस्कृत भाषा में लिखे गए ‘स्कंद पुराणÓ के तमिल संस्करण ‘कांडा पुराणमÓ में उल्लेख है कि देवासुर संग्राम में भगवान शिव के पुत्र मुरुगन (कार्तिकेय) ने दानव तारक और उसके दो भाइयों सिंहामुखम एवं सुरापदम्न को पराजित किया था।

अपनी पराजय पर सिंहामुखम माफी मांगी तो मुरुगन ने उसे एक शेर में बदल दिया और अपना माता दुर्गा के वाहन के रूप में सेवा करने का आदेश दिया।  युद्ध का देवता कहे जाने वाले कार्तिकेय ने दक्षिण भारत में अगस्त्य ऋषि की काफी मदद की थी। क्या कारण था कि शिव पुत्र कार्तिकेय कैलाश छोड़कर दक्षिण की तरफ चल पड़े?