Lok Shakti

Nationalism Always Empower People

सम्पादकीय –भारत और नेपाल को अहिन्दू राष्ट्र बनने से रोकना आवश्यक

Default Featured Image

भारत और नेपाल को अहिन्दू राष्ट्र बनने से रोकना आवश्यक
नेपाल का राष्ट्रीय पशु गाय: कांग्रेस ने कर्नाटक मे गौहत्या पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया
नेपाल और भारत को विश्व में हिन्दू राष्ट्र के रूप में जाना जाता था। नेपाल तो घोषित हिन्दू राष्ट्र था। ब्रिटिश शासन के समय भारत से कोई मुस्लिम देश में भी जाता था तो उसे हिन्दुस्तान का हिन्दू कहकर ही पुकारा जाता था। उस समय हिन्दू सांप्रदायिक शब्द नहीं था। हिन्दुस्तान में रहने वाले हर व्यक्ति को हिन्दू की ही संज्ञा दी जाती थी।
हिन्दू, हिन्दुइज्म, हिन्दुत्व के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का एक आर्डर जस्टिस वर्मा द्वारा दिया गया है। उसमें भी स्पष्ट किया गया है कि हिन्दू एक जीवन पद्धति है।
मुस्लिम लीग के संस्थापक मोहम्मद जिन्ना और अलीगढ़ युनिवर्सिटी के संस्थापक सर सईद के द्विराष्ट्र टू नेशन थ्योरी ने और उसके बाद भारत विभाजन ने हिन्दुस्तान को अहिन्दू की ओर बनाने का प्रयास हुआ। नेहरू-गांधी डायनेस्टी ने इसे गति देने का काम किया।
प्रधानमंत्री मोदी नेपाल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। वहॉ वे भारत और नेपाल के सांस्कृतिक, धार्मिक आस्था को जोड़ते हुये कुटनीतिक सार्थक प्रयास किये हैंं।
माता सीता के मायके जनकपुरी से अयोध्या तक बस सेवा भी प्रारंभ हुई जो राम सर्किट प्रोजेक्ट का एक हिस्सा है।
नेपाल में मोदी जी जनकपुरी, मुक्तिनाथ और पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन किये। इसी समय सिद्धारमैय्या भी वोट डालने के बाद मंदिर गये थे। यदुरप्पा भी मंदिर गये। पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार के समय फिरोज खान के पौत्र बहुरूपीये जनेऊधारी राहुल गांधी मंदिरोंं के दरवाजे खटखटाते रहे हैं।
बावजूद इसके कांग्रेस के नंबर दो नेता गहलोत ने मोदी जी के नेपाल में मंदिरों में जाने पर आपत्ति की है और इसे कर्नाटक चुनाव से जोड़ा है।
इस प्रकार के  कांग्रेस द्वारा सोचे जाने के कुछ कारण हैं। पहला कारण तो यह है कि सोनिया गांधी जब नेपाल गई थी तब उन्हें पशुपतिनाथ मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया था।  दूसरा कारण यह है कि यूपीए शासनकाल में सोनिया गांधी के निर्देश पर उस समय की मंत्री अंबिका सोनी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि राम मिथक हैं, काल्पनिक हैं उसकी कोई हस्ती नही है।
अब प्रधानमंत्री के नेपाल प्रवास से कांग्रेस की इस सोच पर प्रहार हुआ है। इससे वो आहत हैं।
नेपाल एक हिन्दू राष्ट्र घोषित था। वहॉ आज भी गाय राष्ट्रीय पशु है। ठीक इसके विपरीत भारत में कांग्रेस गौहत्या पर प्रतिबंध को सांप्रदायिक रूप देती है। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिये कांग्रेस ने कर्नाटक मेें गौहत्या पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है।
सोनिया गांधी की ईसाई लॉबी और नेपाली माओवादी ईसाई गतिविधियों के झुंड बन गए हैं, डेली पायनियर अख़बार में संध्या जैन ने २००७ में सही कहा : “जबकि दूसरे कमांडर बाबूराम भट्टाराई और उनके परिवार खुले तौर पर ईसाई हैं, प्रचंड अपने धार्मिक सम्बन्धों का प्रचार नहीं करते हैं लेकिन उनकी पत्नी पूरा परिवार ईसाई है। उनके गुरु, चंद्र प्रदेश गजरेल, एक ईसाई प्रचारक थे। सूत्रों का अनुमान है कि 42,000-मजबूत माओवादी सेना 30 प्रतिशत ईसाई होगी, लेकिन कैडर अंधेरे में रखा जाता है कि शीर्ष नेतृत्व मुख्य रूप से ईसाई है। “सवाल यह है कि नेपाल के समाचार मीडिया ने यह कैसे एक बड़ी कहानी याद की?
सोनिया के अनुयायी नेपाल के शीर्ष माओवादी नेताओं से मुलाकात की   * सोनिया के अनुयायी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 3 सितंबर को   एक होटल में माओवादी सुप्रिम प्रचंड और उनके डिप्टी बाबूराम भट्टाराई से मुलाकात की। एक सांसद और कानूनी विशेषज्ञ सिंघवी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के मंत्रिमंडल के रूप में देखा जाता है।
अभी नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री ओली जी जनकपुरी में मोदी जी के साथ थे। उस समय समीक्षा करते हुये कहा गया था कि यद्वपि ओली किसी को भगवान नहीं मानते यदि मानते भी हैँं तो सिर्फ माक्र्स को मानते हैं।
बावजूद इसके पीएम मोदी सभी से मधुर रिश्ता कायम करने में कामयाब हुये हैं। विचारधारा इसमें रूकावट नहीं बनी है। मुस्लिम देशों में भी चाहे वह सऊदी अरब हो या और कोई देश सभी के साथ मोदी जी ने मधुर संबंध स्थापित किये हैं। यही कारण है कि  आज विश्व में भारत का विशेष स्थान है और पीएम मोदी जी विश्व के दस महान नेताओं में माने जाते हैं। इसलिये मोदी जी की नेपाल यात्रा को भारत के हित में एक सफल यात्रा समझा जाना चाहिये।
हमारा प्रयास यह होना चाहिये कि भारत और नेपाल को अहिन्दू राष्ट्र बनने से हमें रोकना चाहिये।