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Editorial: दस दिनों से होटल और रिसोर्ट में कैद कांग्रेस और जेडीएस के विधायक

दस दिनों से होटल-रिसोर्ट  में कैद कांग्रेस-जेडीएस  विधायक
Tags: होटल  रिसोर्ट में कैद, कांग्रेस-जेडीएस  विधायक, ट्रस्ट वोट, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रजातांत्रिक व्यवस्था , दक्षिण भारत में भाजपा, कर्नाटक विधानसभा, येदियुरप्पा
पिछले दस दिनों से कांग्रेस और जेडीयू ने अपने विधायकों को होटल और रिसोर्ट में कैद कर रखा है। जिस प्रकार से जेल में कैदियों की गिनती होती है उसी प्रकार से आज शुक्रवार को  विधानसभा भवन में उन्हें ले जाने के पूर्व उनकी हेड काऊंटिंग हो रही है। आज  ट्रस्ट वोट।
कांगे्रस और जेडीएस के विधायकों को एक लक्जरी रिसॉर्ट और बैंगलोर की होटल में कैद करके रख गया है। असेंबली चुनाव में फ्रैक्चर्ड फैसले के बाद से सांसद १० दिनों से इच्छा के विरूद्ध अपने परिवार से दूर रह रहे हैं। वे अपने परिवारों से मिलने की विनती अपने पार्टी के नेताओं से कर चुके हैं पर उस पर कोई विचार करने की जरूरत नही है।
क्या यही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रजातांत्रिक व्यवस्था की द्योतक हैं?
कांग्रेस ने डोमलूर में हिल्टन दूतावास गोल्फलिंक्स में अपने विधायकों को कैद किया हुआ है जबकि जेडीएस के विधायक बैंगलोर शहर के बाहरी इलाके देवनाहलियन के प्रेस्टिज गोल्फशायर रिज़ॉर्ट में बंधक हैं।
एक कांग्रेस विधायक ने यह कहा है कि हमारे विधायक रिसॉर्ट में रहेंगे जब तक आज फ्लोर टेस्ट खत्म नहीं हो जाता है।
कर्नाटक में हालांकि भाजपा की 55 घंटे पुरानी सरकार को विदा करने में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन कामयाब रहा, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है… भाजपा फिर से मौके की तलाश में है और भविष्य में कभी भी कांग्रेस-जेडीएस सरकार को भाजपा की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है?
भाजपा का अब भी मानना है कि वह कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के आपसी विरोध के चलते सत्ता में वापस आ सकती है?
येदियुरप्पा के इस्तीफे के बावजूद भी अभी भाजपा को उम्मीद है कि वह फिर से सत्ता में लौटेगी! भाजपा नेताओं के हवाले से मीडिया रिपोट्र्स में कहा गया है कि… हम भले ही अभी लड़ाई हार गए हों, लेकिन आगे जंग हम ही जीतेंगे!
भाजपा का मानना है कि दक्षिण भारत में भाजपा समर्थक मतदाता लगातार बढ़ रहे हैं, खासतौर पर लिंगायतों का भाजपा को सशक्त समर्थन न केवल उसे कर्नाटक में प्रमुख ताकत बनाए रखेगा बल्कि दक्षिण भारत के और राज्यों में प्रवेश के अवसर भी प्रदान करेगा!
भाजपा मानती है कि वह बहुमत के एकदम करीब है। और दूसरा यह कि… सत्ता के बंटवारे को लेकर कभी भी कांग्रेस और जेडीएस में विवाद संभव है, इसलिए भाजपा की कर्नाटक में पारी समाप्त नहीं मानी जा सकती है।
कांग्रेस और जेडीएस को असली खतरा तो अपने उन विधायकों से है जो स्वतंत्र होने के बाद भाजपा के दबाव या जोड़तोड़ के प्रभाव में आ सकते हैं?
ताजा राजनीतिक हालात में लिंगायत नेताओं का महत्व बढ़ गया है और जो भी दल इन्हें साधने में कामयाब हो जाएगा, वही सफलता को थामे रखेगा? अभी भी लिंगायत समुदाय भाजपा के साथ है, ऐसे में कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार के लिए परेशानी बढ़ाने में भाजपा को ज्यादा ताकत नहीं लगानी पड़ेगी?
कांग्रेस से रमेश तो बीजेपी से सुरेश ने ठोकी विधानसभा अध्यक्ष की दावेदारी।
भाजपा उम्मीदवार बोले मैं ही जीतूंगा
सुरेश कुमार ने कहा कि भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख बी. एस. येदियुरप्पा के और अन्य नेताओं के निर्देश पर उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया है. उन्होंने कहा, ‘संख्या बल और कई अन्य कारकों के आधार पर हमारी पार्टी के नेताओं को विश्वास है कि मैं जीतूंगा. इसी विश्वास के साथ मैंने नामांकन दाखिल किया है. यह पूछने पर कि भाजपा के केवल 104 विधायक हैं तो ऐसे में उनके जीतने की संभावना क्या है, सुरेश कुमार ने कहा, ‘मैंने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. कल दोपहर सवा बारह बजे चुनाव है. चुनाव के बाद आपको परिणाम पता चल जाएगा.
यहॉ यह स्पष्ट है कि शपथ के साथ कुमार स्वामी सरकार पर लग चुका है ग्रहण, जेडीएस व कांग्रेस से हो गई है बड़ी गलती, डी के शिवकुमार शक्ति परिक्षण के समय मैन ऑफ द मैच रहे वे नाराज चल रहे हैं। कांग्रेस के  लिंगायत विधायक भी उनका कोई मुख्यमंत्री न बनने से नाराज हैं।
यह नाराजगी बाद में भी जारी रहेगी। जारी ही नहीं रहेगी बल्कि बढ़ेगी मंत्रियों की नियुक्ति और उन्हे विभाग सौंपते समय। बाद में भी २०१९ के लोकसभा चुनाव के पहले अनेक अवसर भाजपा के पास आएंगे। वर्तमान गठबंधन की सरकार को चुनौती देने के लिये।
यह संपादकीय लिखने का मुख्य उद्देश्य यह है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देने वाली कांगे्रस और अन्य विपक्षी दल तथा जिहादी सेक्युलर मीडिया चुप क्यों है?
दस दिनों से कैद विधायकों का दर्द क्या उन तक नहीं पहुंचा है। क्या यह प्रजातांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देना नही है?